यांत्रिकी किसे कहते है ? || यांत्रिकी कितने प्रकार की होती है ?
यांत्रिकी किसे कहते है ? || यांत्रिकी कितने प्रकार की होती है ?

यांत्रिकी किसे कहते है?

यांत्रिकी भौतिक विज्ञान की वह शाखा है जिसमें पिण्डों पर बल लगाने या विस्थापित करने पर उनके व्यवहार का अध्ययन करती है। यांत्रिकी की जड़ें कई प्राचीन सभ्यताओं से निकली हैं। यांत्रिकी किसे कहते है ?

मापन–पद्धति में यांत्रिकी 

हमें मापन की आवश्यकता क्यों पड़ती है? सुस्पष्ट है, कि हमारी ज्ञानेन्द्रियाँ किन्हीं दो वस्तुओं के एक जैसे गुण का तुलनात्मक अनुमान करने में तो सक्षम हैं, परन्तु यह अनुमान ठीक ही हो, यह आवश्यक नहीं है। जैसे पूछा जाए कि बकरी व गाय में कौन बड़ा है, तो हमारा उत्तर होगा कि गाय बड़ी है। परन्तु यदि लगभग एक समान दो गेंदें दी जाएँ तो उनमें छोटे–बड़े का अनुमान लगाना बड़ा कठिन कार्य है।

छोटे–बड़े की पहचान केवल अनुमान से नहीं हो सकती, अतः माप–तौल की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार कोई घटना किस समय घटी, इसको व्यक्त करने के लिए समय की माप की आवश्यकता होती है। वास्तव में माप–तौल विज्ञान का आधार है।

10 के घातों में भौतिक राशियों का मान

दस का घात उपसर्ग प्रतीक
1018 एक्सा (Exa) E
1015 पेटा (Peta) P
1012 टेरा (Tera) T
109 गीगा (Giga) G
106 मेगा (Mega) M
103 किलो (Kilo) K
102 हेक्टो (Hecto) H
101 डेका (Deca) da
10-1 डेसी (Deci) d
10-2 सेंटी (Centi) c
10-3 मिली (Mili) m
10-6 माइक्रो (Micro) u
10-9 नेनो (Naino) n
10-12 पीको (Pico) p
10-15 फेम्टो (Fempto) F
10-18 एटो (Atto) atto

 

यांत्रिकी के मात्रक

किसी भौतिक राशि को व्यक्त करने के लिए उसी प्रकार की राशि के मात्रक की आवश्यकता होती है। प्रत्येक राशि की माप के लिए उसी राशि को कोई मानक मान चुन लिया जाता है। इस मानक को मात्रक कहते हैं।

यांत्रिकी कितने प्रकार की होती है?

चिरसम्मत यांत्रिकी

भौतिक विज्ञान में चिरसम्मत यांत्रिकी, यांत्रिकी के दो विशाल क्षेत्रों में से एक है, जो बलों के प्रभाव में वस्तुओं की गति से सम्बंधित भौतिकी के नियमो के समुच्चय की विवेचना करता है। वस्तुओं की गति का अध्ययन बहुत प्राचीन है, जो चिरसम्मत यांत्रिकी को विज्ञान, अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी सबसे प्राचीन विषयों में से एक और विशाल विषय बनाता है।

ठोस यांत्रिकी

ठोस यांत्रिकी की एक समस्या ठोस यांत्रिकी सातत्यक यांत्रिकीकी वह शाखा है जिसमें ठोस वस्तुओं के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। इसमें विशेषतः विभिन्न प्रकार के बल लगाने पर ठोसों की गति और इनमें होने वाली विरूपण (डिफॉर्मेशन) का अध्यन किया जाता है। बल के अलावा ताप परिवर्तन, प्रावस्था परिवर्तन तथा अन्य वाह्य तथा आन्तरिक कारकों के कारण उत्पन्न गति एवं विरूपण का भी अध्ययन किया जाता है। ठोस यांत्रिकी का अध्ययन सिविल इंजीनियरी, यांत्रिक इंजीनियरी, भूविज्ञान तथा पदार्थ विज्ञान आदि के क्षेत्र में बहुत महत्व रखता है।

तरल यांत्रिकी

तरल यांत्रिकी तरल पदार्थो के स्वभाव एवं गति के सिद्धान्तों को समझाने वाली यांत्रिकी की एक शाखा है। तरल, द्रव या गैस हो सकते हैं और उनमें सीमित मात्रा में ठोस के मिले या घुले रहने पर भी इन सिद्धांतों का प्रयोग किया जा सकता है। तरल पदार्थ भी न्यूटन के गति नियमों का अनुसरण करते हैं, पर आकार आसानी से बदल जाने के स्वभाव के कारण इनके गति नियमों को विशेष रूप दिया जाता है। नेवियर-स्टोक्स समीकरण तरल यांत्रिकी के समीकरणों का सबसे विस्तृत रूप है। तरल यांत्रिकी वायव्य, यांत्रिकी, सिविल तथा रासायनिक यंताओं द्वारा मुख्य रूप से प्रयुक्त होता है। जटिल तरल गतिक प्रश्नों के हल के लिए संगणित तरल यांत्रिकी का प्रयोग किया जाता है।

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