धारा 9 क्या है ? | झगडे में पति या पत्नी का घर छोड़कर चले जाना
धारा 9 क्या है ? | झगडे में पति या पत्नी का घर छोड़कर चले जाना

धारा 9 क्या है? | लड़ाई-झगडे में पति या पत्नी का घर छोड़कर चले जाना

धारा 9 क्या है? आजकल तलाक के बारे में अखबारों और न्यूज में काफी पढ़ने को मिल रहा है। कई नामी – गिरामी लोग अपने साथी से तलाक लेने के लिए न्यायालय में आवेदन करते हैं, और एक दूसरे के साथ बिताये हुए वर्षों के वैवाहिक जीवन को समाप्त कर देते हैं। और कई मामलों में तो तलाक लेने की बहुत छोटी – छोटी सी वजह बताई जाती है। विवाह दो पक्षों का मेल होता है, यह बात सही है, लेकिन इसमें एक अधिकार की कभी बात ही नहीं की जाती है। धारा 9 क्या है ?

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धारा 9 क्या है ?

दांपत्य अधिकारों के प्रत्यास्थपन के लिए आवेदन जिला न्यायालय के समक्ष पेश होता है कथा आवेदन पेश करने में अनुचित विलंब करना घातक है। धारा के अंतर्गत डिक्री पारित होने के बाद 1 वर्ष या अधिक समय तक प्रतिस्थापन ना होने पर धारा 13 (1-क) के अंतर्गत विवाह विच्छेद की कार्रवाई प्रारंभ की जा सकती है। बिना युक्ति युक्त कारण के पत्नि या पति एक दूसरे के साहचर्य से पृथक रहते हैं तो दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना की डिक्री पारित की जा सकती है। डिक्री का निष्पादन आदेश 21 नियम 32 एवं 33 के प्रावधानों के अनुसार किया जाता है। आवेदन पेश करने वाले पक्षकार पर आरोप सिद्ध करने का प्रारंभिक भार रहता है किंतु मामले की परिस्थिति के अनुसार विरोध पक्ष पर भी सिद्ध करने का भार आ जाता है।

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लड़ाई-झगडे में पति या पत्नी का घर छोड़कर चले जाना

दांपत्य अधिकारों के प्रतिस्थापन की डिक्री पारित करने के पूर्व तीन बातें विशेष रूप से देखा जाना चाहिए —
(1) क्या पति या पत्नी ने बिना युक्तियुक्तकरण के अपने पति या पत्नी के सहवास से पृथक किया है।
(2) क्या याचिका में कहे गए कथन सत्य है:
(3) डिक्री अस्वीकार करने के लिए अन्य कोई वैधानिक आधार तो नहीं है।

यदि अलग रहने के लिए उपयुक्त कारण एवं आधार है तो डिक्री प्रदान नहीं की जाएगी।

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2. किसी भी पत्नी के लिए अधिक अपमानजनक अगाध और क्या हो सकता है कि पति हीअस्तित्व का आरोप लगाए। पति ने पत्नी पर असतीत्व का आरोप लगाया, मारा पीटा, भूख से तड़पया फलत पत्नी केपिता ने धारा 100 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत अपनी पुत्री को अभिरक्षा में लिया। ऐसी परिस्थितियों में पति किसी भी सहायता को प्राप्त करने का अधिकारी नहीं है इसलिए पति को धारा 9 के अंतर्गत दांपत्य अधिकारों के प्रत्यस्थापन की डिक्री प्रदान नहीं की गई तथा धारा 23(1)(क) के अनुसार भी पति अपने दोष के कारण धारा 9 के अंतर्गत डिक्री पाने का अधिकारी नहीं है।

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