धारा - 376 क्या है ? || झूठा रेप केस कैसे जीतें ?
धारा - 376 क्या है ? || झूठा रेप केस कैसे जीतें ?

धारा – 376 क्या है ? || झूठा रेप केस कैसे जीतें ?

रेप की परिभाषा धारा 375 IPC में दी हुई है इसके अनुसार अगर कोई पुरुष अपना शिशिन, या अपने शरीर का कोई अंग किसी महिला की योनी, मुत्रवाहिनी, गुदा या मुख में किसी भी सीमा तक डालता है या फिर कोई वस्तु महिला की योनी, मुत्रवाहिनी या गुदा में महिला को डराकर, नशे में, प्रलोभन देकर या जबरदस्ती या धोखे से किसी भी सीमा तक डालता है या फिर किसी से ऐसा करवाता है वो रेप की परिभाषा में आता है इसके अलावा 18 वर्ष से कम उम्र की लडकी और 15 वर्ष से कम उम्र की पत्नी से उसकी सहमती से सहवास करना भी धारा 375 IPC रेप की श्रेणी में आता है. धारा – 376 क्या है ? || झूठा रेप केस कैसे जीतें ?

अगर लडकी दिमागी रूप से कमजोर या पागल हो या फिर नशीले पदार्थ के सेवन के कारण वह होश में न हो तब उसकी सहमति भी ली गई हो।या फिर वो 18 वर्ष से कम उम्र की हो ऐसे में लड़की के साथ किया गया शारीरिक सम्बन्ध बलात्कार की श्रेणी में आता है

(दिल्ली हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट के अनुसार अगर पुरुष का शिशिन महिला की योनी को सिर्फ छू भी जाता है और अंदर भी नही जाता है तो भी वो रेप की श्रेणी में आता है | ये परिभाषा इस धारा में नही लिखी है लेकिनं कोर्ट की जजमेंट के बाद रेप को परिभाषित करती है)

धारा – 376 क्या है ? | झूठा रेप केस कैसे जीते?

375 बलात्संग– यह कहा जाता है कि किसी व्यक्ति ने “बलात्संग’ किया है अगर वह व्यक्ति

(क) अपना शिशन किसी भी सीमा तक किसी महिला के योनि, मुँह, मूत्रवाहिका या गुदा में प्रवेश कराता है या उससे या किसी अन्य व्यक्ति से ऐसा करवाता है; या ।

(ख) कोई वस्तु या शरीर का कोई भाग जो शिशन न हो, किसी सीमा तक किसी महिला के योनि, मूत्रवाहिका या गुदा में डालता है या उससे या किसी अन्य व्यक्ति से ऐसा करवाता है; या

(ग) किसी महिला के शरीर के किसी भाग को छलसाधित करता है ताकि योनि, मूत्रवाहिका, गुदा या ऐसी महिला के शरीर के किसी भाग में प्रवेश कराया जा सके या उससे या किसी अन्य व्यक्ति से ऐसा करवाता है; या

(घ) अपना मुँह किसी महिला के योनि, गुदा, मूत्रवाहिका में डालता है या उससे या अन्य व्यक्ति से ऐसा करवाता है; जो निम्नलिखित सात विवरणों में से किसी के अधीन आने वाली परिस्थितियों के अधीन आता होः

धारा – 376 क्या है ? | धारा 376 IPC रेप

(क) एक पुलिस अधिकारी होते हुए बलात्संग कारित करता है

अधिकारी की अभिरक्षा वाले किसी व्यक्ति पर; या

(छ) सामुदायिक या क्षेत्रीय हिंसा के दौरान बलात्संग कारित करता है; या

(ज) किसी महिला के साथ यह जानते हुए कि वह गर्भवती है बलात्संग कारित करता है; या

(ञ) ऐसी महिला के साथ बलात्संग कारित करता है, जो सम्मति देने में अक्षम है; या

(ट) महिला पर नियंत्रण या प्रभुत्व वाली स्थिति में होते हुए ऐसी महिला के साथ बलात्संग कारित करता है; या

(ठ) मानसिक या शारीरिक निःशक्तता से ग्रस्त महिला के साथ बलात्संग कारित करता है; या ।

(ढ) उसी महिला के साथ बारम्बार बलात्संग कारित करता है; – वह ऐसी अवधि के कठोर कारावास से दण्डित किया जायगा जो दस वर्षों से कम का नहीं होगा पर जो

376 AB. बारह साल से कम आयु की महिला से बलात्संग के लिये दण्ड

परन्तु यह कि ऐसा जुर्माना पीड़िता के चिकित्सीय व्ययों को पूरा करने तथा पुनर्वास के लिए न्यायोचित तथा युक्तिसंगत हो

परन्तु यह भी कि इस धारा के आधीन अधिरोपित किसी भी जुर्माना का भुगतान पीड़ित को किया जायेगा

जो कोई भी (क) प्राधिकारपूर्ण स्थिति में या वैश्वासिक सम्बन्ध में होते हुए; या (ख) एक लोक सेवक; या

(घ) अस्पताल के प्रबंधन में या अस्पताल का कर्मचारी होते हुए,

धारा – 376 क्या है ? | 376 D. सामूहिक बलात्संग

ऐसा जुर्माना पीड़िता के चिकित्सीय व्ययों को पूरा करने तथा पुनर्वास के लिए न्यायोचित तथा युक्तिसंगत हो;

इस धारा के अधीन अधिरोपित किसी भी जुर्माना का भुगतान पीड़ित को किया जायेगा

ऐसा जुर्माना पीड़िता के चिकित्सीय व्ययों को पूरा करने तथा पुनर्वास के लिये न्यायोचित तथा युक्तिसंगत हो।

इस धारा के अधीन, अधिरोपित किसी भी जुर्माना का भुगतान पीड़ित को किया जायेगा

ऐसा जुर्माना पीड़िता के चिकित्सीय व्ययों को पूरा करने तथा पुनर्वास के लिए न्यायोचित तथा युक्तिसंगत हो;

यह भी कि इस धारा के अधीन, अधिरोपित किसी भी जुर्माना का भुगतान पीड़ित को किया जायेगा।

रेप के बाद पीडिता को मिलने वाली सुविधाए

  1. मेडिकल करवाने से पहले पीडिता नहाये नही क्योकि इससे बलत्कार के सबूत मिट जाते है
  2. रेप में डॉक्टर अगर अनचाहे गर्भ को हटाने के लिए दवाई दे तो उसे ले ये क़ानूनी सही है |

रेप के आरोप में पुलिस की भूमिका

इसमे पुलिस अफ आई आर करने से मना नही कर सकती है इसके लिए काफी सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट है जिनके अनुसार शिकायत सही हो या गलत  पुलिस अफ आई आर करने से मना नही कर सकती है बाद में चाहे इन्वेस्टीगेशन में पुलिस कुछ भी करे वो उसकी पॉवर है | पर ये तो लाजमी है की ऐसी शिकायत में अफ आई आर तो होगी ही | हा अगर कोई पुलिस ऑफिसर अफ आई आर करने से मना करता है तो शिकायत करने पर वो सस्पेंड हो जायेगा

 रेप के आरोप में कोर्ट की कार्यवाही

कोर्ट किसी भी व्यक्ति को अफ आई आर में लिखे हुये तथ्यों को व कोर्ट की गवाही में दिए हुए तथ्यों के मिलान के अनुसार ही दोषी या निर्दोष साबित करता है तो पुरुष को चाहिए की वो महिला के सारे  तथ्यों व दावों को झूठा साबित करे व महिला को चाहिए की वो अपनी शिकायत पर ही टिकी रहे | यहाँ में ज्यादा नही लिखूंगा क्यों की इन केसों के तथ्यों की प्रक्रति सेकड़ो प्रकार की होती है लेकिन शादी न करने पर सहमती से शारीरिक सम्बन्धो के आरोपों पर कोर्ट का रुख पुरुष की तरफ नर्म ही रहता है |

रेप केस में पीड़ित महिला को जुरमाना भत्ता मिलना

कम लोगो को ही इसके बारे मे पता है  की महिलायों को ऐसे में कोर्ट से अपने पर हुए जुल्म के लिए जुरमाने के तोर पर पैसा भी मिल सकता है

दरअसल आपने देखा होगा की कोई भी केस हो उसका टाइटल स्टेट वेर्सुस ही होता है दरअसल कोई भी जुर्म होता है तो वो स्टेट यानी  सरकार के खिलाफ होता है तो ऐसे में सरकार ही शिकायत कर्ता को जुर्माने के तोर पर पैसा देती है जो की सिर्फ महिलायों  को ही धारा 354 IPC और धारा 376 रेप के केस में मिलता है  ये पैसा अफ आई आर होने के बाद कोर्ट से लिया जा सकता है और ऐसा भी नही है की अगर आप केस हार जाये तो ये पैसा आपको वापस करना पड़ेगा ऐसा बिलकुल भी नही है

पैसा कितना मिलेगा ये कोर्ट पर निर्भर करता है लेकिन रेप के केस में पीडिता को घटना के 6 महीने के अंदर ही मुआवजा दिया जाना जरूरी होता है ये मुआवजा  एक लाख से शुरू होकर कितना भी हो सकता है ये पीडिता के उपर हुए जुल्म के आधार पर निर्भर करता है.

धारा 376 में बेल कैसे ले

ज्यादातर तो ऐसे केसों में बेल चार्जशीट फाइल होने के बाद ही मिलती है लेकिन अगर आपके पास कोई ठोस सबूत है तो आप को बेल मिल सकती है ठोस सबूत से मतलब जैसे की आप घटना वाले दिन कही और थे या फिर ऐसा सबूत जिसमे महिला स्वय आप को सम्बन्ध बनाने के लिए उसका रही हो या फिर बुला रही हो इत्यादि | वैसे एक बात बता दू  रेप केस में बैल मिलने का सबसे बड़ा आधार महिला की मेडिकल रिपोर्ट होती  है अगर वो आपके फेवर में है तो आप बेल ले सकते है लेकिन ज्यादातर ऐसे मामलो में बेल हाई कोर्ट से ही मिलती है.

मेडिकल रिपोर्ट में कमिया देखे व उन्हें हथियार के तोर पर इस्तेमाल करे

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