ताप किसे कहते है ? || तापमापी किसे कहते है ?
ताप किसे कहते है ? || तापमापी किसे कहते है ?

ताप किसे कहते है ? || तापमापी किसे कहते है ?

मापन की इकाई क्या होती है ? किसमें मापा जाता है ? : ताप का मतलब होता है कोई भी वस्तु कितनी ठंडी या गर्म है इसका मापन करना , अर्थात कोई वस्तु अधिक गर्म है तो हम कहते है कि इसका ताप अधिक है और कोई वस्तु ठंडी है तो कहते है की वस्तु का ताप कम है। ताप किसे कहते है

तापमापी का मापन थर्मामीटर या कैलोरीमीटर द्वारा किया जाता है , अत: ताप मापन का मतलब है कि हम उस सिस्टम की आंतरिक ऊर्जा का मापन कर रहे है।

ताप एक भौतिक राशी होती है और इसका सीधा सम्बन्ध कणों की गतिज ऊर्जा से होता है जैसे यदि दो पानी के गिलास है एक गिलास दुसरे की तुलना में अधिक गर्म है तो इसका अभिप्राय है कि गर्म गिलास के पानी के अणुओं में अधिक गतिज उर्जा है अर्थात यदि वस्तु अन्य वस्तु की तुलना में गर्म है तो इसका तात्पर्य है कि गर्म वस्तु में गतिज ऊर्जा का मान ठंडी की तुलना में अधिक है और इसी अधिक गतिज ऊर्जा के कारण है यह वस्तु गर्म महसूस हो रही है।

किसी भी तापक्रम पैमाने पर मापे गए ताप को किसी दुसरे पैमाने पर मापे गए ताप में निम्न सम्बन्ध द्वारा बदला जा सकता है –

(किसी भी स्केल का पाठ्यांक – न्यूनतम नियत बिंदु)/(उच्चतम नियत बिंदु – न्यूनतम नियत बिंदु) = सभी पैमानों के लिए नियत

अत: सभी तापक्रम निम्न सम्बन्ध द्वारा आपस में सम्बंधित है –

(C – 0)/100 = (F-32)/(212 – 32) = (K – 273.15)/(373.15 – 273.15) = (R-0)/(80-0) = (Ra-460)/(672-460)

अथवा

C/5 = F-32/9 = K-273/5 = R/4 = Ra-460/10.6

सामान्यतया जब हम किसी ज्ञात पैमाने से किसी अन्य अज्ञात पैमाने पर जाते है तब निम्नलिखित समीकरण सूत्र प्राप्त होती है –

(ज्ञात पैमाने पर ताप) – (ज्ञात पैमाने के लिए LFP)/(UFP – LFP)अज्ञात = (अज्ञात पैमाने पर ताप) – (अज्ञात पैमाने के लिए LFP)/(UFP – LFP) अज्ञात

ताप किसे कहते है ? || ताप मापने के पैमाने

यूमर पैमाना: इस पैमाने पर अधोबिन्दु या हिमांक को 0° तथा उर्ध्वबिन्दु या भाप बिन्दु को 80° पर अंकित किया जाता है। इन दोनों बिन्दुओं के बीच की दूरी को 80 बराबर भागों में बाँट दिया जाता है।

इस पैमाने पर ताप को R से प्रदर्शित करते हैं।

केल्विन पैमाना: इस पैमाने पर हिमांक या अधोबिन्दु को 273°K तथा भाप बिन्दु को 373°के पर अंकित किया जाता है। इन दोनों बिन्दुओं के बीच की दूरी को समान 100 भागों में विभाजित कर दिया जाता है।

इस पैमाने पर ताप को केल्विन (K) से व्यक्त किया जाता मे मध्यबिन्दु 0°K जल के हिमाँक से 273°K नीचे होता है। केल्विन पैमाने पर 0°K को परम शून्य (absolute zero) कहते है। इसके नीचे कोई ताप संभव नहीं है।

सेल्सियस पैमाना: इस पैमाने का आविष्कार स्वीडन के वैज्ञानिक सेल्सियस ने किया था, जिसके कारण उन्हीं के नाम पर इसे सेल्सियस पैमाना कहते हैं । इस पैमाने में हिमांक को 0°C व भाप-बिन्दु को 100°C में अंकित किया जाता है तथा इनके बीच की दूरी को 100 बराबर भागों में बाँट दिया जाता है। प्रत्येक भाग को 1°C कहते हैं।

इस पैमाने का उपयोग सामान्यतः वैज्ञानिक प्रयोगों (Temperature in Hindi)में किया जाता है।

फारेनहाइट पैमाना: इस पैमाने का आविष्कार जर्मन वैज्ञानिक फारेनहाइट ने किया था। इस पैमाने में ताप को अंग्रेजी के बड़े अक्षर ‘F’ से प्रदर्शित करते हैं। इस पैमाने में हिमांक या निचले बिन्दु को 32°F तथा भाप बिन्दु या ऊपरी बिन्दु को 212°F पर अंकित किया जाता है तथा इनके बीच की दूरी को 180 बराबर खानों में बाँट दिया जाता है।।

तापमापी किसे कहते है?

तापमापी , तापमान मापने के उपयोग में आने वाला यंत्र है। सभी तापमापी , ताप परिवर्तन के साथ

ताप पदार्थ का गुण परिवर्तित होता है , के सिद्धांत पर कार्य करते है।

अच्छे तापमापी पदार्थ में आवश्यक गुण :

चिपकने का गुण न हो (आसंजक बल अनुपस्थित होना चाहिए)

कम गलनांक (कमरे के ताप की तुलना में)

उच्च क्वथनांक

आयतन प्रसार गुणांक अधिक होना चाहिए।

ऊष्मा धारिता कम होनी चाहिए।

चालकता अधिक होनी चाहिए।

पारे में उपरोक्त सभी गुण पाए जाते है यही कारण है कि तापमापी में पारे पदार्थ का उपयोग अधिक किया जाता है।

तापमापी के प्रकार

प्लेटिनम प्रतिरोध तापमापी: -180 से 1150 डिग्री सेल्सियस
गुण : प्लेटिनम कुंडली का विद्युत प्रतिरोध।
लाभ : शुद्ध , अधिक परास होती है।
दोष : परिवर्ती तापक्रम के लिए अनुपयुक्त (अर्थात परिवर्तन के लिए सुस्त)
विशिष्ट प्रयोग : अल्प स्थिर तापान्तर के लिए सबसे अच्छा तापमापी। 183 डिग्री सेल्सियस से 630 डिग्री सेल्सियस के मध्य मानक मापन।

तपयुग्म: -250 डिग्री सेल्सियस से 1150 डिग्री सेल्सियस
गुण : असमान धातुओं की संधि पर तापान्तर के कारण उत्पन्न विद्युत वाहक बल।
लाभ : अल्प उपमीय धारिता के कारण अधिक संवेदनशील , अधिक परास , दूरस्थ स्थानों के मापन में प्रयोग (लम्बे तार लगाकर)
दोष : चलित कुण्डली वोल्टमीटर से विद्युत वाहक बल मापने पर शुद्धता समाप्त होती है (क्यों तेज परिवर्तन के कारण विभवमापी अनुपयुक्त)

विशिष्ट प्रयोग : अल्प स्थिर तापान्तर के लिए सबसे अच्छा तापमापी होता है , गैल्वेनोमीटर के अंशाकन के बाद प्रत्यक्ष मापन , 630 से 1063 डिग्री सेल्सियस के मध्य मानक मापन।

तापमापी के प्रकार

विकिरण तापमापी: 1000 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के लिए।
तापीय मापन के गुण : गर्म वस्तु द्वारा उत्सर्जित विकिरण के रंग।
लाभ : ताप मापन के दौरान सम्पर्क नहीं होता है।
दोष : जटिल , प्रत्यक्ष पाठ्यांक नहीं (प्रशिक्षित प्रेक्षक जरुरी)
विशिष्ट प्रयोग : केवल उच्च ताप के लिए तापमापी , 1063 डिग्री सेल्सियस के ऊपर मानक मापन के लिए उपयोगी है।

कांच में पारा: -39 से 450 डिग्री सेल्सियस
गुण : केशिका नली में पारे स्तम्भ की लम्बाई।
गुण : तेज और सरल (प्रत्यक्ष मापन) , रखने में आसानी होती है।
दोष : टूटने वाला , छोटा आकार एवं सिमित परास होती है।

स्थिर आयतन गैस तापमापी: 270 से 1500 डिग्री सेल्सियस
गुण : स्थिर आयतन पर नियत द्रव्यमान की गैस का दाब।
लाभ : बहुत शुद्ध , अधिक सुग्राही , अधिक परास और इस तापमापी को बनाने में आसानी रहती है।
दोष : बल्ब का आयतन अधिक होना , प्रयोग में सुस्त एवं असुविधाजनक होना।
विशिष्ट प्रयोग : अन्य सभी के अंशाकन के लिए मानक। परास के आधार पर He , H2
और N2 का प्रयोग। आदर्श गैस पैमाने तक संशोधित किया जा सकता है। -183 डिग्री सेल्सियस ताप तक मानक प्रयोग।

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